खूबदास लहरे और गिरीराज ने गुरु परंपरा में लिया पान परवाना
दामाखेड़ा। गुरू परम्परा और अध्यात्म के परम् पूज्य गुरुदेव संत शिरोमणि कबीरदास धर्म समागम सभा में खूबदास लहरे और उनके साथी गिरीराज ने गुरु की शिक्षाओं के अनुसार मद्यपान और अन्य विकारों से दूर रहने का पान परवाना लिया। यह आयोजन कबीर पंथ की गुरु-परंपरा का जीवंत उदाहरण रहा।
सदमार्ग पर चलने का संकल्प
दोनों साथियों ने एक साथ सत्कर्म और सदमार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पंथ श्री हूजूर उदित मुनि राज साहेब जी से मिली दक्षिणा के साथ, उन्होंने अपने जीवन में नैतिक और आध्यात्मिक अनुशासन को अपनाने की प्रतिज्ञा की।
गज़ल में बयां हुआ भाव
इस अवसर पर एक गज़ल भी प्रस्तुत की गई, जिसमें दामाखेड़ा की पावन धरा, गुरु की रहमत और सदमार्ग की प्रेरणा को खूबसूरती से शब्दबद्ध किया गया। गज़ल में यह भाव प्रमुख था कि गुरु कृपा से जीवन के अंधेरों में भी प्रकाश की किरण मिलती है और साधक का जीवन कीर्तन और समर्पण का प्रतीक बन जाता है।
गज़ल का अंश:
“दामाखेड़ा की मिली जो धूल, चन्दन हो गई,
गुरु की रहमत से ये दुनिया अब गुलशन हो गई।”
दामाखेड़ा में कबीर पंथ की गुरु-परंपरा का सानिध्य: दो साथियों ने लिया सदमार्ग का संकल्प
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