गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बिना नोटिस नहीं हो सकती कार्रवाई

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सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी से जुड़े कानूनों को लेकर एक अहम और स्पष्ट फैसला सुनाया है। सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम CBI मामले का निपटारा करते हुए अदालत ने कहा कि बिना नोटिस दिए किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, जब तक कि गिरफ्तारी बेहद जरूरी न हो या इसके पीछे ठोस कारण मौजूद न हों।

यह निर्देश उन मामलों पर लागू होगा, जिनमें दोष सिद्ध होने पर अधिकतम 7 साल तक की सजा का प्रावधान है।


किन मामलों में नोटिस देना होगा जरूरी?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि ऐसे मामलों में पुलिस को गिरफ्तारी से पहले
BNS की धारा 35(3) के तहत आरोपी को नोटिस जारी करना अनिवार्य होगा।
नोटिस के जरिए आरोपी को पेश होने या जांच में सहयोग करने का मौका दिया जाना चाहिए।


कोर्ट ने किन धाराओं का किया उल्लेख?

न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने अपने फैसले में BNS की दो अहम धाराओं का जिक्र किया:

🔹 धारा 35(1)(B)

यदि परिस्थितियां गिरफ्तारी के अनुकूल हों, तो पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है।

🔹 धारा 35(3)

जब तक गिरफ्तारी की ठोस और स्पष्ट वजह न हो, तब तक पुलिस को गिरफ्तारी से बचना चाहिए और पहले नोटिस जारी करना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी पुलिस का अधिकार है, लेकिन यह अनिवार्य कदम नहीं है।


गिरफ्तारी विवेकाधीन शक्ति है, मनमर्जी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस गिरफ्तारी का फैसला अपने विवेक से ले सकती है, लेकिन यह विवेक कानून और जरूरत की सीमा में होना चाहिए।
गिरफ्तारी तभी की जानी चाहिए जब वह:

  • जांच को आगे बढ़ाने में जरूरी हो
  • या केस सुलझाने के लिए आखिरी विकल्प बचा हो

हर गिरफ्तारी के पीछे बतानी होगी ठोस वजह

सीनियर वकील सिद्धार्थ लूथरा ने सुनवाई के दौरान 2025 के भीमसेन नाइक बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले का हवाला दिया।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

  • पुलिस मनमाने तरीके से गिरफ्तारी नहीं कर सकती
  • हर गिरफ्तारी के पीछे स्पष्ट और ठोस कारण बताना अनिवार्य होगा
  • नोटिस देने के बाद भी गिरफ्तारी का फैसला सोच-समझकर ही लिया जाना चाहिए

गिरफ्तारी आखिरी विकल्प होनी चाहिए

अदालत ने दो टूक कहा कि गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार किया जाना चाहिए, न कि रूटीन प्रक्रिया की तरह।
जब तक बिना गिरफ्तारी के जांच संभव हो, तब तक पुलिस को उसी रास्ते पर चलना चाहिए।

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