ईवीएम का सोर्स कोड साझा करना लोकतंत्र की अनिवार्य शर्त उत्तम वासुदेव

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पेंड्रा पूर्व ज़िला अध्यक्ष उत्तम वासुदेव ने कहा है कि ईवीएम का सोर्स कोड साझा करना किसी तकनीकी बहस का विषय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकार का मूल प्रश्न है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह अनिवार्य है कि जिस प्रणाली से देश की सत्ता तय होती है, उसका तर्क और कार्यप्रणाली जनता के सामने हो।

उत्तम वासुदेव ने कहा कि यह तर्क देना कि सोर्स कोड सार्वजनिक करने से ईवीएम असुरक्षित हो जाएँगी, एक जानबूझकर फैलाया गया भ्रम है। “सुरक्षा का अर्थ गोपनीयता नहीं, बल्कि सत्यापन होता है। दुनिया की सबसे सुरक्षित प्रणालियाँ—जैसे इंटरनेट, बैंकिंग और सुरक्षित संचार—ओपन-सोर्स और खुले क्रिप्टोग्राफ़िक मानकों पर आधारित हैं,” उन्होंने कहा।

उन्होंने कहा कि भारत में यह प्रश्न इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि ईवीएम निर्माण से जुड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में हैं। ऐसी स्थिति में सोर्स कोड को गोपनीय रखना निष्पक्षता नहीं, बल्कि सत्ता की सुविधा बन जाता है।

उत्तम वासुदेव ने इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर लगातार उठाने के लिए राहुल गांधी की भूमिका को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि हर मतदाता के अधिकार की है। “अगर मशीन निष्पक्ष है, तो उसकी जाँच से डर क्यों? अगर प्रक्रिया ईमानदार है, तो पारदर्शिता से परहेज़ क्यों?” उन्होंने कहा।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि जर्मनी की सर्वोच्च अदालत, नीदरलैंड और अमेरिका के कई राज्यों ने यह स्पष्ट किया है कि ऐसी चुनावी प्रणालियाँ स्वीकार्य नहीं हैं जिन्हें आम नागरिक सत्यापित न कर सके। लोकतंत्र भरोसे से नहीं, बल्कि जाँच और पारदर्शिता से चलता है।

अंत में उत्तम वासुदेव ने कहा, “ईवीएम जनता की है, चुनाव जनता का है और मशीन का तर्क भी जनता का होना चाहिए। सोर्स कोड साझा करना जोखिम नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा है।”

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