नई दिल्ली । केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) के रिटायर्ड कर्मियों, गैर पेंशनभोगियों, ऑपरेशन के दौरान घायल जवानों तथा शहीदों के आश्रित परिवारों की आर्थिक सहायता के लिए अलग “अर्धसैनिक झंडा दिवस कोष” की स्थापना की मांग तेज हो गई है।
अलॉइंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने इस संबंध में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजते हुए कहा है कि देश की आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ माने जाने वाले अर्धसैनिक बलों के जवान संसद भवन, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, मेट्रो, परमाणु ऊर्जा संयंत्रों, औद्योगिक संस्थानों, सीमाओं की सुरक्षा, चुनावों में निष्पक्षता और नक्सलवाद विरोधी अभियानों में बिना आराम किए अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि नक्सलवाद विरोधी अभियानों के दौरान आईईडी विस्फोटों में बड़ी संख्या में अर्धसैनिक जवान शहीद होते हैं या अंगभंग का शिकार होते हैं, लेकिन उनके और उनके परिवारों की सहायता के लिए सेना की तरह कोई CAPF Flag Day Fund उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में बलों के स्तर पर मौजूद केंद्रीय कल्याण कोष इस आवश्यकता को पूरा करने में अपर्याप्त हैं।
रणबीर सिंह ने उदाहरण देते हुए बताया कि हाल ही में सेना झंडा दिवस कोष से सेवानिवृत्त सैनिकों, गैर पेंशनभोगियों और शहीदों की बेटियों के विवाह हेतु 257 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई, जबकि अर्धसैनिक बलों के लिए ऐसी कोई समर्पित व्यवस्था नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सेना झंडा दिवस कोष की तर्ज पर सामूहिक CAPF झंडा दिवस कोष की स्थापना होती है तो यह ऐतिहासिक कदम होगा। इसके लिए किसी अतिरिक्त बजटीय प्रावधान की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि आम नागरिक और संस्थाएं स्वेच्छा से दान कर सकती हैं।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो अर्धसैनिक जवानों के साथ सीमाओं पर दिवाली मनाते हैं, जिससे जवानों का मनोबल बढ़ता है। संगठन ने उम्मीद जताई है कि नए वर्ष के अवसर पर लगभग 20 लाख पैरामिलिट्री परिवारों को यह कोष एक बड़ा तोहफा साबित होगा।
अर्धसैनिक बलों के लिए अलग झंडा दिवस कोष की मांग, प्रधानमंत्री को सौंपा ज्ञापन
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